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Makar Sankranti 2020: 14 या 15 जनवरी? जानें कब पड़ रही है मकर संक्रांति
(Makar Sankranti 2020 Date) मकर संक्रांति हिन्दू धर्म का प्रमुख पर्व है. ज्योतिष के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है. सूर्य के एक राशि से दूसरी में प्रवेश करने को संक्रांति कहते हैं. मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. मकर संक्राति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्त्व है.
महाभारत से जुड़ा है मकर संक्राति का पर्व
हर साल आने वाली मकर संक्राति इस साल 15 जनवरी को मनाई जाने वाली है. वहीं दक्षिण भारत में इस पर्व को पोंगल के रूप में मनाया जाता है और उत्तर भारत में इसे खिचड़ी, पतंगोत्सव या मकर संक्रांति के रूप में मनाते हैं. इसी के साथ कई जगहों पर इसे उत्तरायन कहते हैं. मकर संक्रांति का अद्भुत जुड़ाव महाभारत काल से है और ऐसी मान्यता है कि कई दिनों तक बाणों की शैय्या पर पड़े रहने के बाद इसी दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर अपना देह त्यागा था. भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था इस कारण से अर्जुन के बाणों से बुरी तरह चोट खाने के बावजूद वे जीवित रहे थे.

वहीं महाभारत के युद्ध में भीष्म 10 दिनों तक कौरवों के सेनापति रहे थे और लगातार पांडव की सेना का संहार कर रहे थे. इसके बाद में पांडवों ने शिखंडी की मदद से भीष्म को धनुष छोड़ने पर मजबूर किया और फिर अर्जुन ने एक के बाद एक कई बाण मारकर उन्हें धरती पर गिरा दिया था. कहते हैं भीष्म पितामह ने ये प्रण ले रखा था कि जब तक हस्तिनापुर सभी ओर से सुरक्षित नहीं हो जाता, वे प्राण नहीं देंगे. इतिहास में प्रचलित एक कथा के अनुसार, ”भीष्म पितामह पूर्व जन्म में एक वसु थे. वसु एक प्रकार के देवता ही माने गए हैं. वसु ने ऋषि वसिष्ठ की गाय चुरा ली थी. इसी बात से क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें मनुष्य रूप में जन्म लेने का शाप दिया था.

भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तराय का महत्व बताते हुए कहा है कि 6 मास के शुभ काल में जब सूर्यदेव उत्तरायन होते हैं और धरती प्रकाशमयी होती है, उस समय शरीर त्यागने वाले व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता है. ऐसे लोग सीधे ब्रह्म को प्राप्त होते हैं. यही कारण भी है कि भीष्म पितामह ने शरीर त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायन होने तक का इंतजार किया.” पौराणिक कथा की माने तो, ”इसी दिन गंगाजी भी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर और कपिल मुनि के आश्रम से होती हुईं सागर में जाकर मिल गई थीं.”

सूर्य से लाभ पाने के लिए क्या करें?

– लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें.
– सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें.
– मंत्र होगा – “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”.
– लाल वस्त्र, ताम्बे के बर्तन तथा गेंहू का दान करें.

– संध्या काल में अन्न का सेवन न करें
मकर संक्रांति पर तिल का कैसे प्रयोग करें?
– सूर्य देव को तिल के दाने डालकर जल अर्पित करें
– स्टील या लोहे के पात्र में तिल भरकर अपने सामने रखें
– फिर “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें
– किसी गरीब व्यक्ति को बर्तन समेत तिल का दान कर दें
– इससे शनि से जुड़ी हर पीड़ा से मुक्ति मिलेगी.





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इस वजह से मकर संक्रांति के दिन पहने जाते हैं काले कपड़े
आप सभी इस बात से वाकिफ ही होंगे कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ अनेक पर्व मनाए जाते हैं. ऐसे में इस समय नया साल आ गया है और नए साल का पहला त्यौहार यानी मकर संक्रांति आने को है. आपको बता दें कि मकर संक्रांति की, देश के कई बड़े शहरों में यह इसी नाम से मनाते हैं लेकिन कई अन्य राज्यों में इस त्यौहार को अलग अलग नाम दिए गए हैं. जैसे पंजाब में इसे लोहड़ी कहा जाता है और तमिल में इसे पोंगल कहते हैं. वहीं सभी जगह नाम अलग है लेकिन सभी के इस पर्व को मनाने का तरीका एक ही है. यह पर्व खुशियों का होता है और इस दिन लोग नए नये कपड़े पहनते है, घर में पकवान बनाते हैं और बच्चे और बड़े सब मिलकर पतंग उड़ाते हैं.

इस दिन लोग अपने घरों में तिल और गुड़ के लड्डू बनाते हैं और एक-दूसरे को बांटकर खाते हैं. इसी के साथ इस दिन घर की महिलाएं हल्दी और कुमकुम का मिश्रण बनाती हैं और पूजा के बाद घर के बाकी सदस्यों के माथे पर इसका टीका लगाती हैं और उन्हें शुभकामनाएं देती हैं. आपको बता दें कि इस दिन की एक परम्परा काले कपड़े पहनने की भी है.

